हर तरफ मेटावर्स शब्द की चर्चा, मगर ये है क्या और आपके किस काम का?

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नई दिल्ली. फेसबुक (Facebook) को अब मेटा (Meta) के नाम से जाना जाएगा. कंपनी ने कहा है कि वो सोशल मीडिया से आगे वर्चुअल रियलिटी में अपनी पहुंच बढ़ाएगी. कुछ दिन पहले फेसबुक के CEO मार्क ज़करबर्ग ने कंपनी का नाम बदलने का इशारा किया था, तभी से मेटावर्स (Metaverse) शब्द का इस्तेमाल काफी होने लगा था. और अब जबकि गुरुवार रात को फेसबुक का नाम बदलकर मेटा कर दिया गया है तो हर जगह मेटावर्स पढ़ने और सुनने को मिल रहा है. लेकिन ये मेटावर्स है क्या? आपके जीवन पर ये किस तरह से असर डाल सकता और यह आपके किस काम का है, इस बारे में कोई नहीं बता रहा. चिंता मत कीजिए, हम आपको सबकुछ बताएंगे.

दूर-दूर बैठे भी होंगे पास-पास
मेटावर्स को समझने के लिए थोड़ा हटकर सोचना पड़ेगा. आज से कुछ समय बाद जब इंटरनेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन जाएगा तो तमाम काम मेटावर्स में होंगे. मेटावर्स मतलब वर्चुअल इन्वायरमेंट (Virtual Environment). मार्क ज़करबर्ग ने इसके बारे में कहा है, इंटरनेट पर मौजूद ऐसा इन्वायरमेंट, जिसके भीतर आप जा सकें, न कि सिर्फ स्क्रीन पर देखकर. जहां दूर-दूर (यहां तक कि दूसरे देशों में) बैठे लोग एक-दूसरे से जुड़ी वर्चुअल कम्यूनिटीज़ में आपस में मिल पाएं, काम कर पाएं या फिर खेल पाएं. ये सब संभव हो सकता है वर्चुअल रियलिटी हैडसेट्स (Virtual Reality Headsets), आर्ग्यूमेंटेड रियलिटी ग्लासेज़ (Augmented Reality Glasses), स्मार्टफोन्स और अन्य उपकरणों के माध्यम से.

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आप एक बार सोचिए, जिसे समझने और समझाने में इतनी दिक्कत है, ऐसे काम को करना कतई आसान नहीं होगा. परंतु कहा जाता है कि आपकी सोच जहां तक जा सकती है, कंप्यूटर और इंटरनेट की दुनिया में वह सब किया जा सकता है. आपकी सोच को हकीकत में उतारना संभव है.

मेटावर्स टेक्नोलॉजी को करीब से देखने और समझने वाली एनालिस्ट विक्टोरिया पेट्रॉक (Victoria Petrock) तो कहती हैं कि इस इन्वायरमेंट में ऑनलाइन लाइफ जैसे कि शॉपिंग और सोशल मीडिया तक सब संभव है. वे कहती हैं कि ये संपर्क की अगली क्रांति है, जिसमें लोग बिलकुल वैसी ही वर्चुअल जिंदगी जीएंगे, जैसी कि फिजिकली जीते हैं.

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मेटावर्स में आप क्या कर सकेंगे?
वह सब कुछ जो आप करना चाहते हैं. आप किसी वर्चुअल कॉन्सर्ट में जा पाएंगे. ऑनलाइन ट्रिप पर जा पाएंगे, आर्टवर्क बना पाएंगे और देख पाएंगे, डिजिटल कपड़े ट्राई करने के साथ-साथ खरीद भी पाएंगे. वर्क-फ्रॉम-होम तो मानो सामान्य सी बात हो जाएगी. घर में बैठकर भी ऐसा लगेगा, जैसे कि आप ऑफिस में बैठे हैं. कभी भी मीटिंग हो सकेगी और मीटिंग में बैठे लोगों को लगेगा कि एक कमरे में बैठकर पूरा डिस्कशन किया गया है.

फेसबुक (अब मेटा) ने पहले ही एक मीटिंग सॉफ्टवेयर लॉन्च कर दिया है. हॉरिज़न वर्करूम्स (Horizon Workrooms) नाम का ये सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए है. इसे ऑक्युलस वीआर हैडसेट्स (Oculus VR headsets) के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. ये मीटिंग के लिए ऐसा एन्वायरमेंट (वातावरण) बनाता है, कि पहली बार में यकीन कर पाना मुश्किल होता है.

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