फेसबुक ने अपने फायदे के लिए अपनाए ‘हथकंडे’, इस्तेमाल किया ‘गंदा’ एल्गोरिदम

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नई दिल्ली. फेसबुक (Facebook) खुद को पॉपुलर करने के लिए हर संभव काम कर रहा था. फिर बेशक वह सामाजिक हित में हो या न हो. एक आंतरिक दस्तावेज से फेसबुक की कारगुजारियों की पोल खुल गई है. कंपनी के लीक हुए आंतरिक दस्तावेज से उजागर हुआ कि कंपनी के इंजीनियरों ने ऐसा एल्गोरिदम विकसित किया, जिससे कि गुस्से और अवसाद वाले इमोजी पोस्ट करने पर 5 पॉइंट और लाइक के लिए केवल एक पॉइंट दिया जाता था. अब आप सोच रहे होंगे कि इससे क्या? इस खबर को अंत तक पढ़ने पर आप पूरी कहानी समझ जाएंगे.

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लीक दस्तावेज के अनुसार उसके इंजीनियरों का मानना था कि गुस्से और इससे जुड़े इमोजी किसी भी लाइक के इमोजी से ज्यादा वायरल होते हैं. ऐसा करके ऐप को ज्यादा लोकप्रिय बनाया जा सकता है. लोग इमोजी के जरिए ज्यादा से ज्यादा समय तक ऐप पर समय बिताते हैं. देखने में आया है कि फेसबुक के इस फॉमूले से ऐप की लोकप्रियता में तो इजाफा हुआ, लेकिन समाज से जुड़े कई मामलों पर लोग तीखी प्रतिक्रिया भी देने लगे. इसमें हाल के दिनों में अमेरिका में हुए कई मामले शामिल हैं, जैसे कि डॉनल्ड ट्रम्प का चुनाव अभियान और रंगभेद विरोधी आंदोलन.

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निगेटिव इमोजी हुए ज्यादा वायरल
लोगों के पोस्ट फेसबुक के इस एल्गोरिदम वाले फॉमूले के कारण निगेटिव इमोजी से बहुत ज्यादा वायरल होने लगे. लेकिन इससे फेसबुक पर हेट स्पीच का ट्रेंड भी बहुत ज्यादा बढ़ गया. क्योंकि यूजर्स को एल्गोरिदम के कारण निगेटिव पोस्ट पर ज्यादा पब्लिसिटी मिलने लगी. फेसबुक की व्हिसल ब्लोअर फ्रांसिस होगेन ने भी सीनेट में अपनी पेशी के दौरान बताया था कि फेसबुक का एल्गोरिदम जन हितों को ताक पर रखता है. कंपनी को अपने मुनाफे से ही सरोकार है.

पांच साल पहले हुई थई शुरुआत
फेसबुक पिछले पांच साल से अपने यूजर्स के लिए इस फॉमूले पर काम कर रहा है. इससे निगेटिव न्यूज फीड कंटेट को और ज्यादा वायरल किया जाता है. लेकिन इससे समाज में वैमनस्य बढ़ने के दुष्प्रभावों के बारे में फेसबुक ने कोई ध्यान तक नहीं देना उचित समझा.

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